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सोयाबीन की खेती कैसे होती है?

सोयाबीन की खेती भारत की सबसे महत्वपूर्ण तिलहन फसलों में से एक है। इसमें लगभग 40% प्रोटीन और 20% तेल पाया जाता है, इसलिए इसकी मांग देश और विदेश दोनों में बहुत अधिक है। भारत में सोयाबीन मुख्य रूप से खरीफ मौसम में उगाई जाती है और मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।
अगर सही तरीके से खेती की जाए, तो सोयाबीन से 15 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज प्राप्त की जा सकती है।

इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे कि सोयाबीन की खेती कैसे होती है, यानी खेत की तैयारी से लेकर कटाई तक की पूरी प्रक्रिया, बिल्कुल आसान भाषा में।

सोयाबीन की खेती कैसे होती है - खेती की तैयारी

अच्छी फसल के लिए खेत की सही तैयारी बहुत जरूरी होती है।

1. मिट्टी और जलवायु

  • उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है।
  • मिट्टी का pH 6 से 7.5 होना चाहिए।
  • गर्म और नम जलवायु उपयुक्त रहती है।
  • आदर्श तापमान 26–32°C होता है।

2. बुवाई का सही समय 

  • बुवाई सही समय और सही दूरी पर करना बहुत जरूरी है।
  • बुवाई जून–जुलाई में बारिश शुरू होने के बाद करें।

3. खेत की तैयारी

खेत की अच्छी तरह जुताई करें और मिट्टी भुरभुरी बनाएं।

4. बीज उपचार

  • बुवाई से पहले बीजों को थिरम या कप्तान से उपचारित करें।
  • इससे बीज और फसल रोगों से सुरक्षित रहती है।

5. बुवाई की विधि

  • सामान्य किस्मों में कतार की दूरी 45 से.मी. और छोटी किस्मों में 30 से.मी. रखें। 
  • पौधे से पौधे की दूरी 5–7 से.मी. होनी चाहिए।
  • मेड़-नाली या चौड़ी पट्टी-नाली विधि से बुवाई करने पर नमी बनी रहती है और पैदावार बढ़ती है। 

6. दूरी का ध्यान

  • पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45 सेमी रखें।
  • पौधे से पौधे की दूरी 4–7 सेमी रखें।

7. निराई-गुड़ाई

  • 20 और 40 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें।
  • इससे खरपतवार कम होते हैं और पौधों की बढ़वार अच्छी होती है।

8. आधुनिक खेती के तरीके

  • ट्रैक्टर जंक्शन और अपनी खेती जैसी आधुनिक विधियों का उपयोग करें।
  • इससे काम आसान होता है और उपज बढ़ती है।

उन्नत किस्में और बीज चयन

अच्छी और ज्यादा पैदावार पाने के लिए सही और उन्नत सोयाबीन बीज का चुनाव करना बहुत जरूरी होता है। उन्नत किस्मों के बीज मजबूत होते हैं, रोगों का असर कम होता है और दाना भराव अच्छा होता है। सही किस्म लगाने से किसान को कम लागत में ज्यादा उत्पादन मिलता है।

भारत में बोई जाने वाली प्रमुख सोयाबीन किस्में हैं:

सोयाबीन किस्म का नाम

बीज दर (किग्रा/एकड़)

प्रमुख विशेषताएं

AVANTIKA R 99

25–30

हाथ से और मशीन दोनों से कटाई के लिए उपयुक्त, फसल संभालना आसान

PUSHPA R-555

25–30

अलग-अलग पौध दूरी में अच्छी तरह उगती है, हर खेत के लिए उपयुक्त

KDS 992 (फुले दुर्वा)

20–25

खोडका रोग के प्रति प्रतिरोधी, फसल सुरक्षित रहती है

JS 9305

25–30

मशीन से कटाई के लिए बहुत अच्छी, मेहनत और समय की बचत

RVSM 2011-35

25–30

सही देखभाल करने पर बहुत अच्छी पैदावार देती है

KDS 753 (फुले किमाया)

25–30

रस्ट (जंग) रोग से बचाव, पौधे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं

JS 335

30–32

एकसमान बढ़वार, फसल का प्रबंधन आसान

MAUS 612

25–30

रस्ट, कीट और फली झड़ने से सुरक्षा, नुकसान कम होता है

सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण

सोयाबीन में अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण सही समय पर करना जरूरी है। 

  • बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह गहरी जुताई करें।
  • बुवाई के तुरंत बाद खरपतवारनाशक का छिड़काव करें।
  • फसल 15–20 दिन की होने पर, मिट्टी में नमी रहते समय स्प्रे करें।
  • खेत में नमी का सही प्रबंधन रखें, पानी की कमी न होने दें।
  • पंक्तियाँ पास-पास रखें ताकि खरपतवार कम उगें।
  • किसी भी दवा का उपयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

कीट और रोग प्रबंधन

फसलों को कीटों और रोगों से सुरक्षित रखने के लिए प्रभावी और वैज्ञानिक प्रबंधन उपाय।

कीट के लिए नियंत्रण उपाय

  • सफेद मक्खी व जसीड के लिए पीले स्टिकी ट्रैप लगाएं
  • इल्लियों को हाथ से चुनकर नष्ट करें
  • ज्यादा प्रकोप पर क्लोरेन्ट्रानिलिप्रोल, थायमेथोक्सम, लैम्ब्डा साइहेलोथ्रिन या बिफेंथ्रिन का छिड़काव करें

 रोग के लिए नियंत्रण उपाय

  • रोग-प्रतिरोधी किस्में लगाएं
  • फसल चक्र अपनाएं और खेत की गहरी जुताई करें
  • बुवाई से पहले बीज को कार्बेन्डाजिम/थायराम से उपचारित करें
  • गेरुआ रोग पर हेक्साकोनाजोल का छिड़काव करें

कटाई और भंडारण

  • जब पत्तियाँ पीली होकर गिरने लगें और फलियाँ पूरी तरह भूरी हो जाएँ, तब फसल की कटाई करें।
  • कंबाइन हार्वेस्टर का उपयोग करें, इससे कटाई और मड़ाई एक साथ हो जाती है और समय बचता है।
  • कटाई के समय बीजों में नमी 13–15% होनी चाहिए, इससे दाने सुरक्षित रहते हैं और नुकसान कम होता है।
  • कटाई के दौरान बीज गिरने न दें, क्योंकि अधिक गिरने से बीज टूट सकते हैं।
  • कटाई के बाद बीजों को 2–3 दिन धूप में या पंखे की हवा में सुखाएँ, जब तक नमी 10–12% न हो जाए।
  • बीजों को सूखी, ठंडी और हवादार जगह पर रखें, जहाँ नमी न हो।
  • बीजों को बोरियों में भरकर जमीन से 10–15 सेमी ऊपर लकड़ी के तख्तों पर रखें।
  • बोरियों का ढेर 4 से ज्यादा ऊँचा न लगाएँ, ताकि बीज टूटें नहीं और अंकुरण क्षमता बनी रहे।
  • हर 15 दिन में भंडारण की जांच करें और जरूरत हो तो हवा दें, ताकि नमी और गर्मी न बढ़े।

निष्कर्ष

अगर किसान भाई सही तकनीक, सही बीज और सही समय पर खेती करें, तो सोयाबीन एक बहुत ही लाभदायक फसल साबित हो सकती है। उम्मीद है यह गाइड आपको समझने में मदद करेगी कि सोयाबीन की खेती कैसे होती है और आप बेहतर उत्पादन पा सकेंगे।

अगर आप सोयाबीन की खेती करना चाहते हैं और उच्च गुणवत्ता के बीज की तलाश में हैं, तो SKB Seeds आपके लिए सही विकल्प है। हम महाराष्ट्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार विश्वसनीय सोयाबीन किस्में उपलब्ध कराते हैं, जो अधिक पैदावार, बेहतर दाने की गुणवत्ता और आम रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोध देती हैं।

SKB Seeds के साथ करें भरोसेमंद खेती और पाएं ज्यादा मुनाफा।

FAQS

1. सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए क्या करना चाहिए?
अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ दोमट मिट्टी और pH 6 से 7.5 होने पर सोयाबीन की पैदावार अच्छी होती है।

2. सोयाबीन की खेती के लिए कौन-सी जलवायु चाहिए?
सोयाबीन की खेती के लिए गर्म और हल्की शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है।

3. सोयाबीन को कितनी धूप चाहिए?
सोयाबीन के पौधों को रोज़ाना कम से कम 6–8 घंटे भरपूर धूप चाहिए।

4. सोयाबीन की बुवाई की गहराई कितनी होनी चाहिए?
सोयाबीन की बुवाई 1 से 1½ इंच गहराई पर करनी चाहिए और 2 इंच से अधिक गहराई नहीं होनी चाहिए।

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